आपका एसी खा रहा ज्यादा बिजली, इसलिए विश्व की 8 टीमें बना रहीं नया मॉडल, अगले साल दिल्ली में टेस्टिंग

गैजेट डेस्क. आपके घर, दुकान और कारखानों को ठंडा कर रहे एयर कंडीशनर बिजली की अत्यधकि खपत करते हैं। इनसे पर्यावरण को भी नुकसान पहुंच रहा है। इसके पीछे वजह यह है कि वर्तमान में उपलब्ध एयर कंडीशनर का मॉडल करीब 100 साल पहले ईजाद किया गया था। तबसे इसमें कोई आमूलचूल बदलाव नहीं हुआ।

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी का आकलन है कि धरती की 10 प्रतिशत बिजली की खपत एयर कंडीशनर में हो जाती है। भारत में फिलहाल 1.40 करोड़ एयर कंडीशनर हैं। ग्लोबल वॉर्मिंग के चलते जिस तेजी से पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है, उससे अनुमान लगाया जा रहा है कि वर्ष 2050 तक इनकी संख्या 100 करोड़ हो जाएगी। वहीं, दुनियाभर में अभी 120 करोड़ एसी हैं, जो 2050 तक 450 करोड़ हो जाएंगे। एयर कंडीशनर की बढ़ती संख्या और बिजली की खपत से चिंतित भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय पहल की है। विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी मंत्रालय ने अमेरिका के रॉकी माउंटेन इंस्टीट्यूट (आरएमआई) के साथ मिलकर ग्लोबल कूलिंग प्राइज स्पर्धा लांच की है। इसमें 24 देशों के साथ यूरोपीय संघ भी शामिल है।'


प्रारंभकि चरण में 95 देशों के 2100 प्रतिभागी इसमें शामिल हुए। इनमें से 8 टीमें चुनी गईं। इनमें तीन भारत की, तीन अमेरकिी, एक-एक चीन और ब्रिटेन की है। इन्हें प्रोटोटाइप बनाने के लिए दो लाख डॉलर दिए गए हैं। विदेशी टीमों को प्रोटोटाइप तैयार कर भारत भेजना होगा। इसकी टेस्टिंग अगले साल दिल्ली की गर्मी में 60 दिन तक होगी। आरएमआई के एमडी इयान कैंपबेल के मुताबकि, नई जनरेशन का एयर कूलिंग सिस्टम पर्यावरण पर पांच गुना कम असरकारी होना चाहिए। भले कीमत मौजूदा मॉडल से दोगुनी हो।

विजेता की घोषणा नवंबर 2020 में होगी। उसे 10 लाख डॉलर का अवॉर्ड दिया जाएगा।
स्पर्धा के तहत कई आइडिया सामने आए हैं। इनमें वेपर कम्प्रेशन प्रौद्योगिकी, वेपर कूलिंग, एवोपरेटिव कूलिंग और सॉलिड-स्टेट कूलिंग प्रौद्योगिकियों के स्मार्ट एवं हाइब्रिड डिजाइन शामिल हैं। कैंपबेल के मुताबकि, असल चुनौती बाद में सामने आएगी। लोगों को यह समझना होगा कि नई तकनीक भले की महंगी है, लेकिन पर्यावरण के लिहाज से बेहतर है।

भारतीय घरों में सबसे कम एयर कंडीशनर (2018 के आंकड़े)

अमेरिका 90%
मेक्सिको 16%
ब्राजील 16%
चीन 60%
जापान 89%
दक्षिण कोरिया 89%
इंडोनेशिया 09%
भारत 07%

आपका एसी खा रहा...
विजेता की घोषणा नवंबर 2020 में होगी। उसे 10 लाख डॉलर का अवॉर्ड दिया जाएगा। स्पर्धा के तहत कई आइडिया सामने आए हैं। इनमें वेपर कम्प्रेशन प्रौद्योगकिी, वेपर कूलिंग, एवोपरेटिव कूलिंग और सॉलिड-स्टेट कूलिंग प्रौद्योगिकियों के स्मार्ट एवं हाइब्रिड डिजाइन शामिल हैं। कैंपबेल के मुताबकि, असल चुनौती बाद में सामने आएगी। लोगों को यह समझना होगा कि नई तकनीक भले की महंगी है, लेकिन पर्यावरण के लिहाज से बेहतर है।



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फोटो क्रेडिट-kaspersky


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